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14 जुलाई 2013 / पुणे के फर्ग्यूसन कालेज में आज गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के बीच छा गए | प्रस्तुत है उनके भाषणों के मुख्य बिंदु –
मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझमें और दूसरों में यही अंतर है कि वो शक्ति में विश्वास करते हैं और मैं सशक्तिकरण में। वो सत्ता चाहते हैं और मैं हर नागरिक को सशक्त बनाना चाहता हूं। मोदी ने सिस्टम को निशाना बनाते हुए कहा कि मैं यहां कोई राजनीतिक बयान नहीं करना चाहता पर एक सवाल है जो मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी सारी अपेक्षाओं को इस सिस्टम ने पूरा किया है?
पहले, शिक्षा इंसान बनाने का मिशन थी जो आज पैसा बनाने का मिशन रह गई है | आज के युवाओं के जब्बे को देखते हुए देश का भविष्य अंधकारमय नहीं हो सकता। देश में आज युवाओं की आबादी 65 फीसद है और उनको सही दिशा की जरूरत है, जिससे वह विश्व का निर्माण कर सके। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुड़े रहते हैं और उनके भाषण में कई विचार नौजवानों के हैं।
मोदी ने कहा कि यहां आने से पहले उन्होंने फेसबुक पर पूछा था कि पुणे में उन्हें क्या कहना चाहिए। इसके जवाब में लगभग ढाई हजार जवाब आए। लिहाजा यहां कहा जाने वाला संबोधन भी उन्हीं लोगों की कही जाने वाली बातों का हिस्सा है जिन्होंने फेसबुक पर उनके प्रश्न का जवाब दिया है। मोदी ने कहा कि शिक्षा और टूरिज्म के जरिए देश का विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को आज आधुनिकीकरण की जरूरत है पश्चिमीकरण की नहीं है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना खाद्य सुरक्षा प्रोग्राम में जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने की बात केवल मात्र दिखावा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लोगो को यह सपना दिखा रही है कि मात्र खाद्य सुरक्षा बिल के आ जाने से सभी थालियों में भोजन उपलब्ध हो जाएगा।
आज देश भर में निराशा की भावना है और भारत को पश्चिमी संस्कृति के बिना आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिभा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है । मोदी ने गुजरात सरकार द्वारा शिक्षा और अन्य क्षेत्र में उपलब्धियों की भी चर्चा की।
देश में एक अच्छी शिक्षा प्रणाली का होना बहुत आवश्यक है। इसके लिए एक अच्छे शिक्षक का होना भी बहुत जरूरी है जिसे आज महत्ता नहीं दी जा रही है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार देश को शिक्षित करने और इसका विकास करने में नाकाम रही है, जो उसका निकम्मापन बताती है। मोदी ने कहा कि चीन अपने जीडीपी का 20 फीसद शिक्षा पर खर्च करता है। वहीं भारत में केवल जीडीपी का सात फीसद शिक्षा पर खर्च होता है जो अब घटकर चार फीसद तक पहुंच गया है।
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि वर्ष 2010 तक विश्व की पांच सौ यूनिवर्सिटी में भारत की दो यूनिवर्सिटी शामिल थीं और चीन कहीं नहीं था। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है। अब इस सूची में चीन की 32 यूनिवर्सिटी शामिल हैं। मोदी ने देश के विकास के लिए खेल और शिक्षा का विकास करने पर जोर दिया।


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