Google+ Badge

28 मई, 2013 को अर्नोल्ड अलर्ट द्वारा फ्रंट पेज में प्रकाशित साक्षात्कार

भारत अमेरिकी बुद्धिजीवी फोरम के अध्यक्ष नारायण कटारिया, का यह विचार उत्तेजक लेख एक अलार्म सा लगता है | इससे पता चलता है कि "हिंदू धर्म पर ग्रहण स्वरुप कुछ चेहरे" भारत के भीतर और बाहर हिंदू विरोधी ताकतों के साथ मिलकर हमारी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट कर, भारत की धरती से हिंदू धर्म को नष्ट करने के घातक मिशन पर काम कर रहे हैं | कटारिया ने आगे कहा है कि भारतीय केवल आतंकवाद का ही सामना नहीं कर रहे हैं, बरन विश्वव्यापी जिहाद के निशाने पर हैं, जिसे वे सम्पूर्ण भूमंडलीकृत फ्रेंचाईजी कहते हैं | उसके माध्यम से वे प्रत्येक गैर मुस्लिम राष्ट्रों को नष्ट करने के लिए ओवरटाइम काम कर रहे."
वर्तमान में भारत की 1.2 अरब आबादी में मुसलमान 20 प्रतिशत हैं | शेष में से अधिकाँश हिन्दू हैं | लेकिन नारायण बताते हैं कि आतंकवादियों के भारतीय सरपरस्त हिंदू नागरिकों, मंदिरों, धार्मिक त्योहारों और निहत्थे तीर्थयात्रियों पर हमले की श्रृंखला में सम्मिलित हैं | उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका में 9/11 के हमलों के एक महीने बाद अल जजीरा टेलीविजन पर एक घोषणा की गई थी कि 'हिंदू भारत' भी जिहाद के लिए लक्षित किया जाएगा | उसके दो महीने बाद ही, 13 दिसंबर, 2001 को नई दिल्ली में भारत के संसद भवन पर आत्मघाती हमले में 9 लोगों की मौत हो गई और 18 घायल हो गए |
तब से हजारों आतंकवादी हमलों ने भारत को घेर लिया है | अकेला मुंबई शहर चार अलग अलग अवसरों पर आतंक का शिकार हुआ | 12 मार्च 1993 को, शहर के विभिन्न भागों में हुए 13 अलग अलग विस्फोटों में 257 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए | आतंकी घटनाओं में सम्मिलित अधिकाँश आतंकवादियों को पाकिस्तान से हथियार और प्रशिक्षण प्राप्त होता है, और भारतीय अधिकारियों को अच्छी प्रकार ज्ञात है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी, इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) सक्रिय रूप से इन घटनाओं में शामिल हैं | 11 जुलाई 2006 को, लोकल ट्रेनों में हुए श्रंखलाबद्ध प्रेशर कुकर बम विस्फोट में 209 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए | एक बार फिर, मुम्बई पुलिस के अनुसार इसमें पाकिस्तानी इस्लामी आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा और भारत के स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट के साथ साथ आईएसआई भी शामिल थी | 26 नवंबर 2008 को, आतंकी हमलों की एक और लहर ने दो लक्जरी होटल, एक यहूदी केंद्र, एक पर्यटक रेस्तरां और एक भीड़ भरे रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया, जिसमें और 166 लोग मारे गए थे तथा 300 से अधिक घायल हो गए | इसी प्रकार 13 जुलाई, 2011 को तीन अलग अलग अलग बम विस्फोटों 26 लोग मारे गए और 130 घायल हो गए.
हाल ही जुलाई 2012 में बांग्लादेश से मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा असम राज्य में शुरू किये गए दंगों में कम से कम 74 लोगों की मृत्यु हुई | हमले के दौरान कई हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार के पश्चात उन्हें टुकडे टुकडे कर दिया गया |
कटारिया का आरोप है कि इन सभी और अन्य कई अत्याचारों पर “भारत की अवनत राजनीतिक संस्कृति और पेड न्यूज़” के चलते कोई राष्ट्रीय नेता सच बोलने का साहस नहीं जुटा पाता | 2008 के चुनाव कवर कर रहे न्यूयॉर्क टाइम्स ने जोर देकर कहा की भारत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के स्थान पर राजनैतिक दल अपने संकीर्ण दलीय स्वार्थों के चलते हिन्दू और मुस्लिम मतों के लिए अधिक चिंतित रहते हैं | कटारिया ने फ्रंटपेज से कहा कि भारत सरकार को शरियत की समझ नहीं है | साथ ही पार्टियां मुसलमानों से भयभीत हैं क्योंकि वे अत्यंत प्रभावशाली संगठित राजनैतिक समूह हैं तथा वे किसी भी उस व्यक्ति को हटाने में सक्षम हैं जो यह सुझाव देने का प्रयत्न करे कि भारत इस्लामी घेरे में है |
कटारिया ने प्रश्न किया कि इस समूह का अंतिम उद्देश्य क्या है ? फिर उत्तर भी दिया कि “जितनी जल्दी हो सके भारत को समाप्त करना |
संख्यावृद्धि एक वाद के रूप में इस्लामवादियों द्वारा नियोजित महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक है | इस प्रकार यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि शरीयत अदालतें सफलतापूर्वक हैदराबाद, पटना और मालेगांव सहित देश के विभिन्न भागों में स्थापित की गई हैं | जैसा कि हाल ही में दो सप्ताह पहले आतंकवाद के जख्म झेल चुके मुंबई में भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (मुस्लिम बोर्ड) द्वारा एक शरीयत अदालत स्थापित की गई है | और उसके लिए मुस्लिम बोर्ड के सचिव मौलाना वली रहमानी ने वही परिचित तर्क दिया कि भारतीय अदालतों का बोझ कम करने के लिए यह किया गया है |
संख्यावृद्धिवाद को टाईम्स ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार रमेश खजांची ने स्पष्ट करते हुए उन घटनाओं का सिलसिलेवार वर्णन किया जिसमें इस्लाम की आलोचना के नाम पर तमिलनाडु के सिनेमाग्रहों में फिल्म “विश्वरूपम” पर प्रतिबन्ध, विभिन्न साहित्यिक समारोहों में लेखक सलमान रुश्दी को काली सूची में डाले जाने और मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के नेता ओवैसी भाइयों द्वारा युद्ध होने पर हिन्दुओं के विनाश की धमकी शामिल है | इस प्रकार शासकों ने भारत में मुस्लिम आक्रामकता को ही बढ़ावा दिया है |
कटारिया ने उल्लेख किया कि किस प्रकार दो हिंदुओं ने “देश में दंगे क्यों होते हैं” शीर्षक से 24 कुरआन "आयतों" युक्त पोस्टर वितरित किया | इन आयतों में अन्य धर्मों के अनुयाईयों के खिलाफ लड़ने की मुसलमानों को आज्ञा दी गई है | उन दोनों की गिरफ्तारी के बाद 1986 में अदालत में अभियोजन पक्ष ने उन आयतों को विकृत संस्करण बताते हुए अमान्य करने की दलील दी | किन्तु कोर्ट ने आयतों को सही मानते हुए उन दो हिन्दुओं के पक्ष में निर्णय दिया | कटारिया ने रेखांकित किया कि न तो मुस्लिम समुदाय ने और न ही दिल्ली सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ अपील दायर की | अब समय आ गया है जब एनएसी (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद) के पक्षपातपूर्ण सदस्य उक्त ऐतिहासिक निर्णय और कुरान की संदर्भित आयतों को पढ़ें और देश विभाजन के बाद भी बढ़ती जा रही सांप्रदायिक हिंसा की वृद्धि के कारण को समझने का प्रयत्न करें |
कटारिया ने उद्धृत किया कि 1947 का भारत विभाजन जिसमें भारत और पाकिस्तान ने ब्रिटेन से स्वतन्त्रता प्राप्त की, विभाजन सांप्रदायिकता आधारित था, जिसके परिणाम स्वरुप एक धार्मिक गृह युद्ध शुरू हो गया था, जिसमें 5,000 से 10,000 लोग मारे गए थे और 15,000 लोग घायल हो गए थे | मुस्लिम लीग द्वारा 'डायरेक्ट एक्शन' के रूप में हिंदुओं के खिलाफ 23 सूत्रीय जिहाद कार्यक्रम प्रायोजित हुआ जिसके दौरान "महान कलकत्ता हत्याकाण्ड” कारित हुआ था |
कटारिया ने अपने देश के इतिहास के उस भाग का वर्णन करते हुए कहा कि " मुस्लिम लीग पार्टी” द्वारा प्रतिपादित दो राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर 1947 में भारत विभाजित किया गया था | उसके बाद पाकिस्तान तुरंत एक इस्लामी राज्य के रूप में घोषित कर दिया गया था | इसी आधार पर भारत एक हिंदू राज्य घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ | यह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई एक बड़ी भूल थी | तबसे ही हिंदू धर्म देश के 'धर्मनिरपेक्ष' कट्टरपंथियों के शब्दकोश में एक गंदा शब्द बन गया है, साथ ही भारत में प्रचलित धर्मनिरपेक्षता, हिन्दू की आलोचना का पर्याय बन गई है |
फ्रंट पेज के साथ चर्चा में कटारिया इस्लाम के बारे में अपनी भावनाओं पर अडिग रहते हैं | उन्होंने कहा कि मैं पाकिस्तान में पैदा हुआ, किन्तु मुझे पाकिस्तान न छोड़ने पर मार डालने की धमकी दी गई | मैंने अपनी आँखों से मुसलामानों द्वारा किये गए बलात्कार और ह्त्या की घटनाएँ देखी हैं | उसके बाद अनेक मुस्लिम देशों की यात्रा कर उनको भी देखा है | यद्यपि विगत 45 वर्षों से उन्होंने अमरीका को अपना घर बना लिया है, फिर भी अपने देश के बारे में अत्याधिक चिंतित रहते हैं, जिसके विषय में उन्हें भय है कि वह तेजी से धर्म आधारित गृह युद्ध की और बढ़ रहा है | अपने निबंध में उन्होंने कहा कि इस संभावित युद्ध के दो कारण हैं, एक तो बढ़ते हुए जिहादी हमले, दूसरा तेजी से बढ़ती मुस्लिम आवादी | मुस्लिम आवादी जिस अनुपात में बढ़ रही है, उसके अनुसार अगले तीस चालीस वर्षों में इस संयुक्त उपमहाद्वीप में मुसलमानों की संख्या हिन्दुओं से अधिक हो जायेगी |
कटारिया सत्ताधीशों के अत्यधिक आलोचक है | वे कहते है कि "दुर्भाग्य से सदियों से चली आ रही हिंसक मुठभेड़ों के बावजूद, जिहादी आतंकवाद के प्रति न तो भारत सरकार ने और न ही कोमा ग्रस्त हिंदू नेताओं ने कोई सामरिक सबक सीखा है" | वह लिखते हैं कि समय आ गया है जब हिन्दू नेताओं और आम जनता को अर्नोल्ड तोयन्बी का वह प्रसिद्द उद्धरण याद रखना चाहिए कि " सभ्यतायें आत्महत्या से मरती हैं, हत्या से नहीं” | जिहाद का हिम्मत से सामना करने का समय आ गया है और सुसाईड चट्टान की और नींद में चलने से रुकने का भी |
कटारिया चिंता व्यक्त करते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका भी राजनीतिक रूप से उन्ही कारणों से, उसी चट्टान की दिशा में बढ़ रहा है | वे कहते हैं कि मैं नहीं चाहता कि अमेरिका इस्लाम द्वारा नष्ट हो | यह पूछे जाने पर कि तथाकथित उदारवादी मुसलमान भी समान रूप से चिंतित हैं, उन्होंने फ्रंटपेज से उस धारणा का मजाक बनाया | उन्होंने कहा कि एक उदारवादी मुस्लिम जैसी कोई चीज इस्लाम में नही है | उन्होंने दलील दी कि सच्चे मुसलमानों का मानना ​​है कि इसका यह अर्थ होगा कि वे कुरआन में यकीन नहीं करते जिसके अनुसार प्रत्येक सच्चा मुसलमान एक "सैनिक" है |
जिन्हें कटारिया के विचार आक्रामक प्रतीत होते हैं, तो उन्हें यह विचार करना चाहिए कि उन्हें कैसा अनुभव होता यदि अमरीका में भी उसी दर से आतंकवादी हमले होते, जैसे कि भारत में हो रहे हैं | कटारिया को चिंता है कि किसी दिन अमरीका भी स्वदेशी इस्लामी आतंकवादियों कि बढ़ती हुई संख्या द्वारा अर्द्ध नियमित आतंकवादी हमलों के अधीन हो जाएगा | हम अपने स्वयं के जोखिम पर उनकी चेतावनी की अनदेखी कर सकते हैं |

Advertisement

 
Top