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अटल जी के शासनकाल में पूरे देश में सडकों का जाल बिछाया गया | आजादी के बाद किसी भी पंचवर्षीय योजना में न केवल सर्वाधिक, वरन विगत ३२ वर्षों के सड़क निर्माण का आधा उस दौरान बिना किसी राजनैतिक भेदभाव के निर्मित हुआ | किन्तु यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि मध्य प्रदेश और गुजरात के लिए स्वीकृत 3000 किमी सड़कें निरस्त कर दी गई हैं | यह कोई आरोप भर नहीं है | स्वयं केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे में ये तथ्य स्वीकार किये हैं | प्रस्तुत है इस विषय का पूरा विवरण |
नई दिल्ली: सोमवार को संप्रग सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि पिछले 32 वर्षों के दौरान बने राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई में से लगभग आधे राजग शासन के पांच साल में बने |
शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तु एक दिलचस्प हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्वीकारा कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 1980 में 29,023 किलोमीटर थी जिनका 2012 के अंत तक 76,818 किमी तक विस्तार हुआ | इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय राजमार्गों में 47,795 किलोमीटर 32 साल में सरकारों द्वारा जोड़ा गया है |
इस प्रकार शपथ पत्र दर्शाता है कि 1997-2002 (नौवीं पंचवर्षीय योजना) के दौरान जब राजग सत्ता में था, तब राष्ट्रीय राजमार्गों में कुल 23,814 किमी जोड़ा गया था, यह निर्माण विगत 32 वर्षों में हुए राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार की कुल लंबाई का लगभग 50% है | इससे पता चलता है कि अटल जी के प्रधान मंत्रित्व काल के दौरान हुए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण आजादी के बाद से किसी भी पांच साल की अवधि के दौरान हुए राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में सर्वाधिक है |
जबकि शपथ पत्र के अनुसार यूपीए सरकार के करीब 10 साल के शासन के दौरान बने राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई बहुत कम, अर्थात लगभग 16,000 किमी ही थी |
महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 2012-2017 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के लगभग 3,000 किमी का निर्माण किया जाना प्रस्तावित किया गया था, किन्तु केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की 530 किमी और गुजरात में 627 किमी की अधिसूचना को रद्द करने का निर्णय लिया |
यह हलफनामा वाहन चालकों के लिए राजमार्गों को सुरक्षित बनाने व दुर्घटना के शिकार लोगों के लिए शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग करने वाली संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा दायर एक जनहित याचिका के जबाब में आया था |
भारत में प्रति वर्ग किमी में से 1.43 किमी का सड़क घनत्व के साथ कुल सड़क नेटवर्क 46.90 लाख किलोमीटर है | इनमें से राष्ट्रीय राजमार्ग 79,116 हैं, जबकि राज्यों के राजमार्गों की लम्बाई 1,55,716 किमी है और शेष 44.55 लाख किमी को 'अन्य सड़कों' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है |
केंद्र के अनुसार "राष्ट्रीय राजमार्गों में कुल सड़क नेटवर्क का केवल 1.7% शामिल है लेकिन उन पर सड़क यातायात 40% है |
याचिकाकर्ता ने सडकों पर बुनियादी सुविधाओं के आधुनिकीकरण व यातायात सुधारों के लिए प्रार्थना की थी | उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत डीजल और पेट्रोल वाहनों में तेजी से वृद्धि ने शहरों में सभी सार्वजनिक परिवहन सीएनजी ईंधन से संचालित करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को निष्प्रभावी कर दिया है |
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि सरकार को बहुत पुराने वाहन चरणबद्ध रूप से हटाने हेतु निर्देशित किया जाये, जो सड़क पर चलने योग्य नहीं हैं तथा वायु को प्रदूषित करते हैं | लेकिन केंद्र न कहा कि ऐसे वाहनों को हटाने की चरणबद्ध समय सीमा तय कर दी गई है, अतः यह विचारणीय मुद्दा नहीं है |
शपथ पत्र में कहा गया कि "केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 59 के तहत वाहनों की आयु सीमा तय करने का अधिकार तो दिया है, किन्तु फिर भी कोई नीतिगत निर्णय केंद्र सरकार द्वारा (इस संबंध में) नहीं लिया गया है |

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