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14 जुलाई 2013 को पुणे के फर्ग्यूसन कालेज में श्री नरेंद्र मोदी ने जब शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता प्रतिपादित की तो वह केवल जवानी जमा खर्च नहीं था | उन्होंने पहले गुजरात में उसका सफल प्रयोग किया था |
जब उन्होंने कहा कि देश में एक अच्छी शिक्षा प्रणाली का होना बहुत आवश्यक है। इसके लिए एक अच्छे शिक्षक का होना भी बहुत जरूरी है जिसे आज महत्ता नहीं दी जा रही है। तब सहज उत्सुकता होती है कि अच्छे शिक्षकों की प्राप्ति के लिए गुजरात में क्या व्यवस्था हुई है |
क्या आप जानते हैं कि गुजरात में शिक्षकों की भर्ती 10 + 2 परिक्षा के अंकों के माध्यम से होती है | उसके लिए प्रथक से कोई प्रतियोगी परिक्षा का आयोजन नहीं होता | यही कारण है कि शिक्षकों की नियुक्तियों में होने वाला भ्रष्टाचार वहां शून्य होता है |
केवल अविवाहित व्यक्ति का ही चयन शिक्षक के लिए होता है, क्योंकि वहां चयनित आवेदकों को दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाता है | प्रशिक्षण अवधी में केवल अत्यावश्यक अवकाश पर घर जाने की सुविधा होती है | इस प्रशिक्षण को ही वहां बीएड डीएड की मान्यता प्राप्त होती है | इस दौरान पुरुष व महिलाओं के आवास की प्रथक प्रथक व्यवस्था होती है |
प्रशिक्षण उपरांत उन्हें जब शिक्षक के रूप में कार्यक्षेत्र में भेजा जाता है तो मानदेय में कोई कंजूसी नहीं होती | शिक्षकों का वेतन वहां अन्य प्रदेशों की तुलना में कहीं अधिक है | और सबसे अहम बात वहां संविदा शिक्षक नहीं होते |
महापुरुष के नाम पर वहां बच्चों को केवल गांधी नेहरू इंदिरा की विरुदावली नहीं रटाई जाती | देश के लिए समर्पित 160 महापुरुषों के कार्यों और विचारों की जानकारी कक्षा आठ तक पहुंचते पहुंचते हर बच्चा प्राप्त कर लेता है |
तीन महीने में एक बार वे खुद किसी ना किसी विद्यालय में पहुंचकर शिक्षकों और विद्यार्थियों से आत्मीयता पूर्ण संवाद करते हैं और इसीलिए मोदी जी ख़म ठोककर कह पाए कि शिक्षा इंसान बनाने का मिशन होना चाहिए, और यह कि शिक्षा को आज आधुनिकीकरण की जरूरत है पश्चिमीकरण की नहीं है

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