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भोपाल/ 27-08-2013 / आज हर जगह राजनीति हावी है, जो न कल शुभ थी न आज है और ना आने वाले कल में शुभ लक्षण है | आज हिन्दू मुस्लिम संवाद की सर्वाधिक आवश्यकता है | हमारा देश एक है, तहजीब परम्पराएं एक हैं, यहाँ तक कि पूर्वज भी एक हैं | यह विषय ऐसा है जिस पर सबसे संवाद किया जा सकता है, किन्तु वोट की राजनीति इन सब बातों को गौण कर फूट डालने का कार्य कर रही है | राष्ट्रीय मुस्लिम मंच दोनों समाजों में संवाद द्वारा राष्ट्रवाद का भाव जगाने का कार्य कर रहा है |
समाचार पत्र संपादकों व वरिष्ठ पत्रकारों के साथ संवाद के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक श्री इन्द्रेश कुमार जी ने उक्त विचार व्यक्त किये | कार्यक्रम का आयोजन विश्व संवाद केंद्र द्वारा किया गया था | इस अवसर पर इन्द्रेश जी ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना तथा उसके उद्देश्यों की प्रष्ठभूमि पर प्रकाश डाला | उन्होंने कहा कि सारी दुनिया जिसको ऊपरवाला कहती है, उसे ही पैगम्वर, अल्लाह, गॉड या परमात्मा के अलग अलग नामों से पुकारा जाता है | उन्होंने अपना संस्मरण सुनाते हुए कहा कि मैं एक बार कश्मीर के खीर भवानी मंदिर के दर्शनों के पश्चात हजरत बल दरगाह गया | तथा वहां के इमाम साहब से पूछा कि क्या मैं यहाँ अपनी भाषा, अपनी बोली में इबादत कर सकता हूँ ? और इबादत करने पर मुझे उसकी रहमत मिलेगी अथवा नहीं ? उन्होंने कहा कि कुरआन पाक या हदीस में यह विषय स्पष्ट नहीं है | मैंने कहा जिसे आप अल्लाह कहते हो उसे ही हम भगवन कहते हैं | उनकी हिचकिचाहट देखकर मैंने उनसे फिर पूछा कि अल्लाहो अकबर को अंग्रेजी में क्या कहेंगे ? यही कहेंगे न कि गॉड इज ग्रेट ? उन्होंने इस पर हाँ कहा तो मैंने उनसे विनम्रता से कहा कि अगर अल्लाह को गॉड कहा जा सकता है तो भगवान् क्यों नहीं ? मैंने आगे कहा कि अल्लाह ताला को रब उल आलमी कहा गया है तो उस पाक परवरदिगार के आलम में मैं हूँ या नहीं तथा जब वह बेजुबानों की भी जुबान समझता है तो क्या मेरी जुबान नहीं समझेगा | इसके बाद कमेटी के 32 लोग एक अलग कमरे में विचार विमर्श के लिए इकट्ठा हुए तथा लौटकर मुझे न केवल अनुमति दी वल्कि यह भी कहा कि खुदाबन्द करीम मेरी इबादत सुनेगा भी और कबूल भी करेगा, रहमत भी बरसायेगा |

इसी प्रकार राजौरी की एक सभा में उन्होंने उपस्थित जन समुदाय से कहा कि दुनिया के सारे धर्म एक बात पर पूर्णतः सहमत हैं, वह यह कि जो जन्मता है वह मरता है | पाकिस्तान का जन्म 14 अगस्त 1947 को हुआ और बंगलादेश का जन्म 16 दिसंबर 1971 को | किन्तु भारत का जन्म कब हुआ कौन बता सकता है ? भारत अजन्मा है इसलिए अमर भी है |
इसी प्रकार एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित मौलाना और पादरी से प्रश्न किया कि हिन्दू तो हर धर्म की इबादतगाह में जाता है, किन्तु आप कितनी बार किसी मंदिर या गुरुद्वारे में गए ? हिन्दू तो सुपर सेक्यूलर है और भारत में अगर धर्मनिरपेक्षता है तो केवल हिन्दू के कारण | किन्तु दुर्भाग्य से उसे ही कम्यूनल कहा जाता है और जो वास्तव में कम्यूनल हैं उन्हें सेक्यूलर का सर्टीफिकेट दिया जाता है |
हिन्दू मुस्लिम में एकात्मता हेतु राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा 19 अगस्त 2013 को जयपुर में रक्षा बंधन कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें 1500 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने सहभागिता की | उन्हें भेंट स्वरुप शील की प्रतीक चुनरी, सुहाग चिन्ह चूड़ियाँ, इबादत हेतु रुमाल, मिष्ठान आदि अर्पित की गईं | 13 जून 2013 को देश भर में चार वर्कशॉप आयोजित हुए | उसके पश्चात 4,4 – 5,5 के समूह में मुसलमान वन्धु कश्मीर गए तथा वहां की परिस्थितियों पर वहां के नागरिकों से चर्चा की | लौटकर उन्होंने धारा 370 को समाप्त करना राष्ट्रहित में मानकर आठ लाख चार हजार पांच सौ अनठानवे हस्ताक्षरों का ज्ञापन राष्ट्रपति महोदय को प्रदान किया | महामहिम राष्ट्रपति ने भी इस प्रयत्न की अत्यंत सराहना की |
आज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 8 पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं, 150 से अधिक प्रवासी कार्यकर्ता हैं | 22 प्रान्तों में प्रभावी संरचना है | तीन सत्रों में संचालित इस कार्यक्रम में श्री रमेश शर्मा, श्री जयकृष्ण गौड़ तथा डॉ. अजय नारंग ने प्रस्तावना में कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला |

श्री इन्द्रेश कुमार - एक साक्षात्कार
अध्ययन की द्रष्टि से एक मेकेनिकल इंजीनियर इन्द्रेश कुमार जी का संघ से सम्बन्ध वाल्यावस्था से ही था | उनके पिताजी भी संघ के स्वयंसेवक रहे | अपने महाविद्यालयीन अध्ययन काल में भी इन्द्रेश जी का संघ से सम्बन्ध कायम रहा |  देश के लिए कुछ करने की हार्दिक इच्छा के कारण 1970 में वे संघ के प्रचारक बने | श्री इन्द्रेश जी के शब्दों में “लाभप्रद व्यवसाय के प्रस्तावों को दरकिनार कर मैंने अपने सौभाग्य से यह मार्ग चुना | मेरे विचार में राष्ट्रभक्ति रहित केरियर कोई केरियर नहीं था | वस्तुतः मेरे निर्णय से परिवार भी उल्लसित था और उन्होंने एक बार भी मुझसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए नहीं कहा | बहुत धूमधाम से उन्होंने मुझे देश, समाज और धर्म के काम के लिए विदा किया |”
संघ प्रचारक के रूप में इन्द्रेश जी ने देश भर में कार्य किया | जब आतंकबाद अपने चरम पर था तब संयोग से इन्द्रेश जी जम्मू कश्मीर में ही थे | इन्द्रेश जी उन दिनों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि “उस समय पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध प्रोक्सी वॉर छेडा गया था | उस समय सरकार, सेना तथा प्रशासन सभी ने लोगों के पुनर्वास में सहायता तथा उनका सरकार में विश्वास बनाये रखने हेतु हमारा सहयोग माँगा | हमारे संगठन ने वह सब किया जिससे लोगों में प्रजातांत्रिक व्यवस्था व न्याय प्रणाली पर भरोसा बना रहे | हमने जम्मू कश्मीर सहायता समिति का गठन किया जिसमें करोड़ों रुपये की मदद प्राप्त हुई | उद्देश्य एक ही था कि जम्मू कश्मीर के लोग यह अनुभव करें कि अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के समय में शेष भारत उनके साथ है, जिससे उनके मन में शेष भारत के प्रति एकात्म भाव जागृत हो | उस समय हमारा प्रमुख लक्ष्य था राज्य के नौजवानों को राष्ट्रीय और सामाजिक दायित्व का बोध कराना, ताकि वे आतंकवादियों के हाथ का खिलौना न बनें |”
इन्देश जी ने आगे बताया कि राष्ट्रीय एकात्मता बनाए रखने में तीर्थयात्राओं का बहुत महत्व होता है, यह अनुभव कर हमने सिन्धु उत्सव प्रारम्भ किया जिसमें दूर दराज के लोग लद्दाख में स्थित सिन्धु के उद्गम तक गए | हमारा उद्देश्य केवल लद्दाख घाटी को प्रसिद्धि देना भर नहीं था वरन पर्यटकों के माध्यम से उस क्षेत्र के विकास में सहयोग देना भी था | हमारे इस प्रयत्न को भारी सफलता मिली जो आज तक जारी है |
उन्होंने 1990 में संघ द्वारा अमरनाथ यात्रा को पुनर्जीवित करने के प्रसंग को जम्मू और कश्मीर के लोगों और भारत सरकार के बीच विश्वास बहाली में महत्वपूर्ण बताया | जब हमने इसे प्रारंभ किया तब बमुश्किल 25000 यात्री ही इसमें सम्मिलित हुए थे | हमने सम्पूर्ण देश में अभियान चलाकर लोगों को अमरनाथ यात्रा हेतु प्रेरित किया | हमने एक लाख लोगों को यात्रा से जोड़ा, जिसने राज्य में आतंकवाद के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | वहां कुछ स्थान ऐसे थे जिन्हें मुस्लिम बहुल कहा जाता था तथा आतंकी वहां अपना साम्रदायिक एजेंडा चलाकर उत्तेजना फैलाते थे | जब हमने यात्रा प्रारम्भ की तब कुछ लोगो के मन में भय था | हमने उनसे कहा कि जीना मरना ईश्वर के हाथों में है | हम पर दो बार हमले हुए, लोग मरे, किन्तु हम इसे सफल करने हेतु अडिग थे | उस समय आर्मी ने हमारी बहुत सहायता की | अमरनाथ यात्रा के माध्यम से कश्मीर के अधिकाँश मुस्लिमों को भी समझ में आया कि यह उनके जीवन यापन में कितनी सहयोगी है, तथा मुसलमान आतंकियों के खौफ से सुरक्षित भी महसूस करने लगे | आतंकियों का प्रभाव भी इन क्षेत्रों में क्रमशः कम होने लगा तथा कश्मीरियों के मन से भय का मनोविज्ञान कम होने लगा |
इन्द्रेश जी ने सरहद को प्रणाम कार्यक्रम का विशेष उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत की 15106 कि.मी. की सीमा को कवर किया गया तथा भारत के युवाओं को अपने देश की सीमाओं की यात्रा तथा वहां रहने वालों की कठिनाइयों को अनुभव करने का अवसर मिला | उत्तर पूर्व के लोगों के मन में विश्वास पैदा करने हेतु की गई तवांग यात्रा का भी उन्होंने उल्लेख किया | लम्बे समय से चीन तवांग पर अपना दावा जताता रहा है, अतः हमें लगा कि यह उपयुक्त समय है कि देश के लोग एकजुट हों तथा सीमा पार एक स्पष्ट सन्देश जाए कि तवांग हमेशा से हमारा था तथा हमेशा हमारा ही रहेगा |
उन्होंने कहा हमारा सदा से एक ही उद्देश्य रहा है और रहेगा – इस देश की एकता | हमारा सम्पूर्ण जीवन इस कार्य हेतु समर्पित है | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अत्यंत गतिशील नेता श्री इन्द्रेश जी ने संघ के उग्रवादी होने के आरोप को सिरे से नकारा | उन्होंने कहा “हमारा सदा से द्रढ़ विश्वास रहा है कि बन्दूक और पिस्तौल भगवान् के नहीं शैतान के खिलौने हैं | आज सम्पूर्ण देश में संघ स्वयंसेवकों के माध्यम से ढाई लाख से अधिक सेवा कार्य चल रहे हैं | स्वार्थ रहित राष्ट्र सेवा सदैव हमारा घोष वाक्य रहेगा |”

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