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पूर्व राष्ट्रपति श्री ए पी जे अब्दुल कलाम ने अनेकों पुस्तकें लिखी हैं | उनमें से एक My Journey: Transforming Dreams into Action और दूसरी “हमारी प्रजातांत्रिक प्रणाली हमारी जिम्मेदारी क्यों है”, पूर्णतः देश के युवाओं को लक्ष्य कर लिखी गई है | उसी सन्दर्भ में उनके दिए गए एक इंटरव्यू के कुछ अंश –
प्रश्न - आज बड़प्पन अधिकांशतः भौतिक संपत्ति से नापा जाता है | और प्रकारांतर से यह समाज में असंतोष पैदा करता है | क्या आपको लगता है कि इस भौतिकवाद को दूर करना आज समय की मांग है ?
उत्तर -
मेरा हाई स्कूल तक का अध्ययन ब्रिटिश भारत में हुआ | 1947 में हमने स्वतंत्रता प्राप्त की और भारतीयों के भारत में रहना शुरू किया | मैंने समाज में हो रहे विभिन्न परिवर्तनों को देखा है, यह चाहे अर्थव्यवस्था हो या हमारा वेल्यू सिस्टम | यद्यपि हमारी अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है , किन्तु  हमें नैतिक और मूल्य परक नागरिकों की आवश्यकता है | पिछले 10 वर्षों से मैं एक विचार को बढ़ावा दे रहा हूँ, वह है “प्रबुद्ध नागरिकों का विकास | इसके तीन आयाम हैं |

पहला है मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली | यह या तो परिवार से संभव है अथवा प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक द्वारा | मेरा अंतिम निष्कर्ष है कि प्रबुद्ध नागरिकों का विकास न केवल भारत के लिए वरन सम्पूर्ण विश्व के लिए आवश्यक है |

दूसरा आयाम है आर्थिक समृद्धि और तीसरा धर्म द्वारा हमारा आध्यात्मिक शक्ति में रूपांतरण | मैं इन तीन आयामों का पक्षधर हूँ | ( www.abdulkalam.com )
मैंने हमारी संसद में व्याख्यान दिया, 23 राष्ट्रों की यूरोपीय संसद तथा 53 देशों की पैन अफ्रीकी संसद और कोरियाई संसद को भी संबोधित किया है |
मैं यह नहीं कहता कि भारतीय मूल्य परंपरा अन्य देश भी स्वीकार लें | उनकी अपनी मूल्य प्रणाली के आधार पर विकसित महान नेता और परंपरायें हैं | मैं समझता हूँ कि जीवन मूल्य, संयुक्त परिवार प्रणाली , आर्थिक विकास और धर्म का एक आध्यात्मिक शक्ति में रूपांतरण सभी के लिए महत्वपूर्ण है | यही कारण है कि इस विचार को मैंने विभिन्न इंटरैक्टिव मंचों पर साझा किया है |

प्रश्न – आपका काम युवाओं की विचार पद्धति को बदलने व श्रेष्ठता प्रदान करने में प्रेरणादायक है | आज जब हम भूख , बीमारी , बिगड़ते पर्यावरण और जीर्णशीर्ण रहन सहन आदि समस्याओं का सामना कर रहे है, आपको क्या लगता है “देश की दशा कब तक सुधरेगी, कभी सुधरेगी भी या नहीं” ?
उत्तर –
विचार कृति का बीज है | विचार जैसा कि पुरातन सुकरात का था | 2200 साल पहले तिरुवल्लुवर ने भी कहा था – और इसी कारण मैंने भी संसद में प्रस्तावित किया था कि हमें “भारत विजन 2020 की आवश्यकता है | 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से विकसित हो जाना चाहिए | अब भी बहुत देर नहीं हुई है | संसद को विचार करना चाहिए कि कैसे समृद्धि के उद्देश्य से इस राष्ट्र दृष्टि को विकसित किया जा सकता है | हमारी प्राथमिकता होना चाहिए  ' ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना ' | हमारे किसान 250 लाख टन खाद्य सामग्री का उत्पादन कर रहे हैं | लेकिन हम मूल्य संवर्धन नहीं करते, जिसका अर्थ है अधिक निर्यात की संभावना | हम फलों और सब्जियों के अग्रणी उत्पादक हैं, किन्तु हम इनका जूस या डिब्बाबंद खाद्य के रूप में प्रोसेस नहीं करते | और तीसरा, स्पष्ट ही लघु उद्योग जो देश भर में फैले हुए हैं |
प्रश्न - आप पुरा परियोजनाओं के साथ संपर्क में हैं , जो इन परिणामों को दिखा रहे हैं ?
उत्तर -
मैंने मध्यप्रदेश में देखा है , चित्रकूट प्रकल्प नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित किया गया है |
वह एक अग्रणी प्रकल्प है जो बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है, 500 से अधिक गांव उससे जुड़े हुए हैं , और समृद्ध है | मैंने महाराष्ट्र में वारना प्रकल्प को देखा | वह सहकारी आंदोलन को बहुत अच्छी तरह से गति दे रहा है और गरीबी उन्मूलन कर रहा है और तीसरा मैंने वल्लम , तंजावुर तमिलनाडु में देखा है |
मैं इन तीनों के साथ संपर्क में हूँ , और अक्सर वहां की यात्रा करता हूँ |
इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी के साथ कुछ प्रकल्प शुरू किये हैं | प्रकल्पों  की संख्या बढ़ती जा रही है | किन्तु यह अधिक तेजी से होना चाहिए | कुल मिलाकर लगभग 600,000 (छःलाख) गांव हैं, तो हमें अगले 10-15 साल के समय में कमसेकम 7000 प्रकल्प  स्थापित करना है | जबकि अभी इनकी संख्या 100 से भी कम है |
प्रश्न – यदि माता पिता भ्रष्टाचार में लिप्त है तो उन्हें भी समझाने के लिए युवाओं प्रेरित करने वाली युवा वाहिनी की क्या संभावना है ? और “हम क्या दे सकते है” मिशन की क्या स्थिति है ?
मिशन ' मैं क्या दे सकता हूँ ' कई स्कूलों और कॉलेजों में शुरू हुआ है |
यह एक संरचित कार्यक्रम नहीं है , हम एक सा करना भी नहीं चाहते , इससे यह विचार विकसित नहीं होगा | यह प्रत्येक संस्था की जिम्मेदारी है कि वह अपने यहाँ ऐसा कोई कार्यक्रम शुरू करें और सुधार को बढ़ावा दें | तभी हम खुशहाल घर की कल्पना साकार कर पायेंगे | खुशहाल घर के चार लक्षण हैं | पहला आध्यात्मिकता , दूसरा मां की खुशी, तीसरा पारदर्शिता , और चौथा एक हराभरा और स्वच्छ वातावरण | युवा शपथ लेते हैं कि वे भ्रष्टाचार से मुक्त घर में रहते हैं |
प्रश्न - आपका लेखन महान संतोष को दर्शाता है , यह आपको क्रियाशील रहने से कभी नहीं रोकता ?
उत्तर –
ईश्वर केवल उन्हीकी मदद करता है जो कठिन परिश्रम करते हैं | संतोष जैसा कुछ भी नहीं है | सफलता ही अंतिम लक्ष्य नहीं होता |
अपनी समस्याओं को यह अनुमति नही देना चाहिए कि वे तुम्हें डूबा ही दें | मुझे लगता है मैं एक महीने में 80,000 से 1,00,000 युवाओं से मिलता हूँ, इसलिए स्वयं को संतुष्ट नहीं कह सकता |
मैं उनके सपनों और उनके दर्द को जानता हूँ | वह राष्ट्र मर जाता है जिसका कोई दृष्टि पथ नहीं होता | संसद को चाहिए कि वह दृष्टि पथ दे |

लिंक -

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/a-nation-without-a-vision-dies/article5065821.ece

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