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कौन बचा है जग में प्यारे नहीं किसी का दास,
प्रभू दास बनना कल्याणी, शेष उड़े परिहास !

प्रभु ने गर स्वीकार किया तो करते तार तार,
निर्मल करने धोया, कूटा, पीट लगाया पार !

जगत नहीं है किंचित स्थिर, हर पल है गतिमान,
क्षण भंगुर है आता जाता, मोह करे नादान !

जगत लुभावन, सुन्दर, लेकिन भ्रम का है जंजाल
बिम्ब मात्र मोहक जो दिखता, होता माया जाल !

हम जैसे ही जान सकेंगे यह असार संसार,
दर्शक बन देखें प्रभु क्रीडा पा जायेंगे सार !

बटें प्रेम की बाती मन से करें प्रेम से सिंचित,
जला भक्ति की ज्योति करें जीवन पथ भी आलोकित !

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