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हाँ, चाहें तो इसे भारत कि हकीकत मान सकते हैं | जरूरी नहीं कि इसे सीमा पर चीनी सेना की दादागिरी से जोड़ें | और भी मामले हैं, ढेरों मामले हैं, जिनमें भारत महान लाचार है | कभी सुना है आपने फिरोजाबाद का नाम ? कभी यह शहर चूड़ियाँ बनाकर पूरे देश को भेजा करता था | यहाँ से विदेश भी चूड़ियाँ जाती थीं | भारतीय महिलाओं के श्रृंगार में चूड़ियों का क्या महत्व है, इसे बताने की जरूरत नहीं है | बचपन से अपन फिरोजाबाद का नाम सुनते आये हैं, और यह कि यह शहर भारत की शान है | लेकिन अब यह शहर चीन का एक गोदाम हो गया है | मतलब चीन से चूड़ियाँ बनकर आती हैं और फिरोजाबाद के व्यापारी उन्हें पैक करके अपने नाम से बेच रहे हैं | भारत कि खांटी देशी जरूरत को भी जब चीन ने अपने कब्जे में कर लिया है तो बाक़ी क्षेत्रों यानी कि टेलकाम, मोवाईल, बिजली सामान आदि में उसके दबदबे की सहज कल्पना की जा सकती है |
चीन ने पिछले तीस वर्षों में स्वयं को दुनिया की फेक्ट्री के रूप में बदला | और देखते ही देखते चीन बन गया और भारत जैसे देश की फेक्टरियों पर ताले डल गए | फिरोजाबाद में 1996 तक कांच उद्योग के लगभग 410 कारखाने थे, जिनमें दिन रात काम होता था | पूरे देश को यहाँ बनी चूड़ियाँ, ग्लास बीड्स, झाड फानूस आदि सप्लाई होते थे | अचानक पर्यावरण का शोर हुआ, सुप्रीम कोर्ट का फरमान निकला कि कोयले से चलने वाली भट्टियों से प्रदूषण होता है, सो नई तकनीक की गैस आधारित भट्टियां बनें | एक तो गैस महंगी, ऊपर से पर्याप्त सप्लाई भी नहीं | देखते ही देखते सवा दो सौ कारखानों में ताले डल गए | सदियों से जो हुनर अपन आप पनपा था, उसे अदालतों और अफसरों की नजर लग गई | उसके बाद बर्बादी तो होने ही थी | भला कौन, कितनी और किस किस को रिश्वत दे ? प्रमाण पत्र के लिए कहाँ कहाँ ठोकरें खाता फिरे ?
चीन ने मौके का फायदा उठाया | कारोबारियों ने आसान रास्ता चुना और चीन से आयात कराना शुरू कर दिया | भट्टियां बंद हुईं और एसेम्बलिंग तथा पैकेजिंग का काम शुरू हुआ | जैसे बजाज कम्पनी चीन के कारखानों से बिजली का सामन बनवाकर उन्हें भारत में अपने ब्रांड से बेचती है, उसी प्रकार फिरोजाबाद के चूड़ी व्यापारी भी चीन से चूड़ियाँ मंगवाकर बेच रहे हैं |
यही स्थिति भारत के अधिकाँश बाजार की है | दिल्ली का भागीरथ पैलेस हो या करोलबाग की साज सज्जा वाली दुकानें, सब तरफ चीनी सामान की धूम है, वही पटा पडा है | रक्षा बंधन को भाईयों की कलाई में बंधने वाली राखी से लेकर मोवाईल और कम्पूटर चिप तक चीन ने अपनी पैठ बना ली है | चीन बनाता जा रहा है और भारत की फेक्टरियों पर ताले डल रहे हैं | मजे की बात यह कि वे ताले भी चीन ही बना रहा है |
दरअसल हम लाचार हैं | महाबली चीन के सामने भारत राष्ट्र राज्य बेबस है | ज़रा विचार कीजिए कि चीन ने क्या केवल भारत के उद्योग मंत्री आनंद शर्मा को चूड़ियाँ पहनाईं हैं या हम सबको ? क्या शर्म से डूब मरने के लिए चुल्लू भर पानी भी हमारे पास है ? आखिर देश के दुश्मनों को फलने फूलने का मौक़ा देनी वाली सरकार चुनने का पाप तो हमारा अपना ही है न ?
-    साभार श्री हरिशंकर व्यास (नया इंडिया 6 अगस्त 2013)

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