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1991 बैच के आईएएस अधिकारी श्री अशोक खेमका कोलकाता, पश्चिम बंगाल में पैदा हुए | उन्होंने 1998 में खड़गपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से स्नातक तथा टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान मुम्बई से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी और एमबीए किया हुआ है। उनके द्वारा विभागों में भ्रष्टाचार उजागर करने के कारण उन्हें बार बार हरियाणा के अपने गृह कैडर में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा स्थानांतरित किया गया । खेमका 21 साल में 40 बार स्थानांतरित हुये ।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच संदिग्ध भूमि सौदों पर कार्रवाई करने वाले श्री खेमका को मौत की धमकी भी प्राप्त हुई । खेमका हरियाणा के भूमि और भूमि पंजीकरण के रिकार्ड महानिरीक्षक थे | विभाग में अपने 80 दिन के कार्यकाल के दौरान, खेमका ने नव निर्मित रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा कई सौ करोड़ रुपये मूल्य की पंचायत भूमि के हस्तांतरण में गंभीर अनियमितताओं का पता लगाया था।

उच्च पदों पर भ्रष्टाचार को उजागर करने में उनके निडर प्रयासों व 'भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध' के लिए उन्हें श्री संजीव चतुर्वेदी के साथ उन्हें 2011 एसआर जिंदल पुरस्कार' से सम्मानित किया गया व 10 लाख रुपये नकद प्रदान किये गए ।

आज उन्हीं अशोक खेमका ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जमीन विवाद की जांच कमेटी को सौंपे जवाब में खेमका ने कहा कि गुडग़ांव में 3.53 एकड़ जमीन खरीदने और बेचने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। साथ ही कमर्शियल कॉलोनी लाइसेंस के आधार पर बड़ा प्रीमियम हासिल किया गया। हरियाणा सरकार ने अक्टूबर-2012 में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। खेमका ने इस समिति को जवाब सौंपा है। खेमका ने कहा है कि डीएलएफ को दो बार लाइसेंस से इनकार किया जा चुका था, लेकिन जैसे ही वाड्रा की कंपनी इसमें शामिल हुई, लाइसेंस जारी हो गया। इसके बदले में वाड्रा की कंपनी को प्रति एकड़ 15 करोड़ 78 लाख रुपए का प्रीमियम मिला।

लैंड डील रद्द करने पर खेमका को चकबंदी विभाग से बीज वितरण निगम में भेजा गया। कुछ समय बाद आर्काइव विभाग में। खेमका ने जब सौदे को रद्द किया तो सरकार की जांच समिति ने इस फैसले को गलत बताया था। साथ ही कहा था कि खेमका ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया। उनसे इसी का जवाब मांगा गया था।
खेमका ने रिपोर्ट में कहा है कि 2005 से 2012 के बीच 21,366 एकड़ जमीन पर कई तरह के लाइसेंस जारी हुए। प्रति एकड़ एक करोड़ रुपए मानें तो आठ वर्षों में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। वाड्रा ने प्रति एकड़ 15.78 करोड़ रु. कमाए। ऐसे में घोटाले की रकम 3.5 लाख करोड़ रुपए हो जाती है।
१. फरवरी-08 में वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन खरीदी। सेल डीड में साढ़े सात करोड़ रुपए का चेक से भुगतान का जिक्र है। चेक फर्जी है। यानी सौदा पूरी तरह फर्जी हुआ।
२. अगस्त-08 में वाड्रा की कंपनी ने जमीन 58 करोड़ में डीएलएफ को दी। डीटीसीपी ने लाइसेंस ट्रांसफर की अनुमति दी। सितंबर-12 में सौदा पूरा।
३. मार्च-08 में सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से वाड्रा की कंपनी ने कमर्शियल कॉलोनी का लाइसेंस हासिल किया।

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