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11 सितम्बर वह दिन जब सेंकडों वर्षों की गुलामी की जंजीरों में जकडे आत्मविश्वास शून्य भारत के चिरंतन तत्वज्ञान की श्रेष्ठता विश्व रंगमंच पर निर्विवाद रूप से स्वीकार की गई | यह करिश्मा कर दिखाने वाले स्वामी विवेकानंद जी के 150 वें जन्म वर्ष “स्वामी विवेकानंद सार्ध शती समारोह” के अंतर्गत 11 सितम्बर 2013 को सम्पूर्ण देश के समान भोपाल में भी भारत जागो दौड़ का आयोजन किया गया | स्थानीय तात्याटोपे स्टेडियम से प्रारम्भ इस दौड़ में बीस हजार से अधिक नवयुवकों ने भाग लिया |
इस अवसर पर उड़न परी के नाम से विख्यात प्रख्यात धाविका सुश्री पी.टी. उषा, भारतीय होकी टीम के पूर्व कप्तान श्री अशोक ध्यानचंद तथा क्रिकेट खिलाड़ी श्री मदनलाल ने मशाल जलाकर जैसे ही कार्यक्रम का शुभारम्भ किया, समूचा तात्याटोपे स्टेडियम करतल ध्वनि तथा वन्दे मातरम के जयघोष से गूँज उठा | बाद में नौजवानों के उत्साह वर्धन हेतु अतिथियों ने दौड़ में भी भाग लिया | इस दौड़ में शामिल राजधानी के विद्यालयों तथा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था | उत्साह से लवरेज कई युवा स्वामी जी की वेशभूषा में सम्मिलित हुए तो हजारों की संख्या में युवा धावक स्वामी विवेकानंद के चित्रयुक्त टीशर्ट पहने हुए थे | दौड़ तात्याटोपे स्टेडियम से प्रारम्भ होकर रोशनपुरा, न्यू मार्केट होते हुए पुनः स्टेडियम पहुंचकर समाप्त हुई |

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख श्री अनिल ओक, अ.भा. प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य, सह प्रचार प्रमुख श्री जे. नंद कुमार, वरिष्ठ प्रचारक व अ.भा. कार्यसमिति सदस्य श्री मधुभाई कुलकर्णी एवं बड़ी संख्या में राजनैतिक व सामाजिक कार्यकर्ता, स्वामी विवेकानंद जी के चित्र युक्त टी शर्ट पहिने कार्यक्रम में सहभागी हुए |
इस अवसर पर बोलते हुए उड़न परी पी.टी. उषा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के सिद्धांत व विचार आज की परिस्थितियों में युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं | उन्होंने इस आयोजन से जुड़ने को स्वयं का सौभाग्य निरूपित किया | गायिका सुहासिनी जोशी के देशभक्ति पूर्ण गीत व चित्रांस बाघमारे के काव्य पाठ ने आयोजन की गरिमा में चार चाँद लगा दिए | सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाली अभिनेत्री कनिका तिवारी और श्रुति सिंह को आयोजन समिति की ओर से सम्मानित किया गया | कार्यक्रम के समापन में बाबा श्री सत्यनारायण मौर्य ने देशभक्ति पूर्ण गीत गाते हुए भारत माता तथा अमर शहीद भगतसिंह का चित्र बनाकर युवाओं में जोश भर दिया |
पूर्व तैयारी
भोपाल महानगर के चारों जिलों में हर नगर व बस्ती में भारत जागो दौड़ के पूर्व माहौल बनाने एवं कार्यक्रम को सर्वस्पर्शी बनाने की द्रष्टि से तीन माह पूर्व से बैठकों का क्रम प्रारम्भ हुआ | 50 हजार युवाओं तक स्वामी जी का सन्देश “भारत जागो विश्व जगाओ” पहुंचाने का लक्ष्य लिया गया | इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए भारत जागो दौड़ आयोजन समिति बनाई गई, जिसमें भोपाल स्थित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, कुलपति, विद्यार्थी एवं खेल संस्थाओं के सम्माननीय अध्यक्ष-संचालक, समाज के प्रवुद्ध जन तथा सक्रिय युवाओं को सम्मिलित किया गया | आयोजन समिति के मार्ग दर्शन में त्रिस्तरीय कार्य योजना बनाई गई |
भोपाल महानगर के हर बस्ती मोहल्ले को इस अभियान से जोड़ने के लिए 20 आयोजन समितियां तथा 600 संचालन समितियां बनाई गईं | इन समितियों के माध्यम से 1087 मोहल्लों में “भारत जागो दौड़” के लिए युवाओं का पंजीयन प्रारम्भ किया गया |
महानगर की कुल 206 बस्तियों में से 190 बस्तियों में रिले रेस का आयोजन किया गया | यह रेस एक नगर से प्रारम्भ दूसरे नगर तक जाती तथा अगले दिन उस नगर से दूसरे नगर को प्रस्थान करती | इस अभिनव प्रयोग में बाल स्वयंसेवकों से लेकर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तक सभी ने उत्साह पूर्वक भाग लिया |
इस रिले रेस आयोजन में 11000 युवाओं ने भाग लिया तथा लगभग 50000 नगर वासियों ने इसका अवलोकन किया |
स्वामी जी ने शिकागो में प्रश्न उठाया था कि दुनिया एक है, हम सब एक हैं, तो फिर पारस्परिक ईर्ष्या, द्वेष क्यों है ? देश के बड़े बड़े चिन्तक विचारक आत्म निरीक्षण कर रहे हैं कि विविधता में एकता की सुन्दरता, जो भारतीय संस्कृति का मूल तत्व रहा, कहाँ खो गया ?
किन्तु संघ में तो समरसता जीवन का अभिन्न अंग ही है | उंच नीच, छोटे बड़े का कोई भेद नहीं | इसीलिए बैठकों के बाद सहभोज का अपना अलग ही आनंद होता है | भोजन के बाद निकल पड़ते नगर की सडकों पर, गलियों मोहल्लों में “भारत जागो दौड़” की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अलख जगाने छोटे बड़े सभी स्वयंसेवक |

कब दिन ढल जाता, सांझ बीत जाती और रात्रि की कालिमा सब कुछ अपने आगोश में ले लेती, लेकिन स्वयंसेवकों का उत्साह सूर्य अपनी आभा बिखेरता ही रहता –
पथ चाहे घोर अन्धेरा हो, दुःख द्वंदों ने भी घेरा हो,
हो महावृष्टि भीषण गर्जन, करता हो महाकाल नर्तन,
पर कब किससे डरने वाले, हम संघर्षों में पलते हैं ,
वाधाओं से भय नहीं हमें, हम तूफानों में चलते हैं ||

प्रतिदिन स्वयंसेवक सार्वजनिक रूप से माँ भारती की वंदना करते | किसी सार्वजनिक स्थान पर सामूहिक रूप से भारत माता की आरती होती –
तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं |
गणमान्य नागरिकों व बुजुर्गों को भी प्रतिदिन भारत माता की आरती में सादर आमंत्रित किया जाता –

आरती के बाद क्या घर को रवाना ? अरे नहीं साहब अभी 11 सितम्बर तक घर किसको जाना है ? कुछ और नए लोग आ जुड़े हैं और फिर शुरू हुआ नगर भ्रमण का दौर, चौराहों पर होर्डिंग बैनर पताका लगाने को किस पर आश्रित हैं, सब कुछ अपने हाथों से ही तो करना है आखिर स्वयंसेवकों को |
शपथ लेकर पूर्वजों की, आस हम पूरी करें,
मस्त होकर कार्यरत हो, ध्येयमय जीवन धरें,
दे रहे युग को चुनौती, आज हम ललकार कर,
ले चलें हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार कर |
अपने सीने पर स्वामी विवेकानंद का चित्र लगाए इन युवकों के मन मस्तिष्क भी उनके आदर्शों से अनुप्राणित है, तभी तो कभी पद यात्रा से प्रचार तो कभी वाहन रैली से जोश का प्रगटीकरण | 
महाविद्यालयीन विद्यार्थियों का उत्साह भी देखते ही बनता था, और क्यों न हो, स्वामी विवेकानंद जी ने देश की तरुणाई पर ही तो सबसे ज्यादा आशा और विश्वास व्यक्त किया था, इन शब्दों के साथ - “आवश्यकता है वीर्यवान, तेजस्वी, श्रद्धा संपन्न, दृढ विश्वासी और निष्कपट नवयुवकों की | यदि ऐसे सौ भी मिल जाएँ तो संसार का कायाकल्प हो जाए | अज हमें जिसकी आवश्यकता है, वह है – लोहे के पुट्ठे और फौलाद के स्नायु | हम लोग बहुत दिन रो चुके | अब अपने पैरों पर खड़े हो जाओ | हमें ऐसे धर्म की आवश्यकता है, जिससे हम मनुष्य बन सकें | हमें ऐसे सिद्धांतों की आवश्यकता है, जिससे हम मनुष्य बन सकें | जो भी तुमको शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक दृष्टि से दुर्वल बनाए, उसे जहर की भांति त्याग दो | वह कभी सत्य नहीं हो सकता | सत्य तो वह है जो शक्ति दे, जो ह्रदय के अन्धकार को दूर कर दे, जो ह्रदय में स्फूर्ति भर दे |”
5 टीमों ने 70 महाविद्यालयों में रिले रेस के माध्यम से संपर्क किया, जिसमें लगभग 8000 युवकों ने भाग लिया |
महानगर के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों, मेडिकल, इन्जीनियरिंग, पोलिटेक्निक एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवुद्धजनों ने भी स्वामी जी के सपनों का भारत बनाने के लिए युवा शक्ति का आह्वान किया “भारत जागो विश्व जगाओ” | 16 वरिष्ठ वक्ताओं ने 12300 विद्यार्थियों के समक्ष स्वामी विवेकानंद के विचार आलोक में “भारत का भविष्य निर्माण और उसमें मेरी भूमिका” विषय पर प्रकाश डाला |
विश्व विभाग के अ.भा. सह संयोजक श्री सदानंद जी सप्रे, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री वृजकिशोर कुठियाला, सांसद श्री अनिल माधव दवे तथा प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत सह संयोजक श्री दीपक शर्मा आदि ने महाविद्यालयों में छात्रों को संवोधित किया |
छात्रों ने न केवल उन्हें सुना वरन उसके बाद प्रेरित होकर वे भी निकल पड़े नगर की सडकों पर अलख जगाने | इन युवाओं के साथ मिलकर वरिष्ठ जनों की टीम ने 400 विद्यालयों में पहुंचकर भारत जागो दौड़ के लिए पंजीयन तथा भाषण आदि आयोजित किये |
इतिहास हमारा संबल है, विज्ञान हमारा है भुजबल,
गत वैभव का आदर्श आज, कर देगा भावी भी उज्वल |
इस आयोजन की सफलता एवं व्यापकता के लिए 18 युवकों ने एक माह का समय दिया व घर छोड़कर चोबीसों घंटे परिश्रम किया | 500 युवा विद्यार्थियों की टीम प्राणपन से इस आयोजन की सफलता हेतु जुटी | अंततः इन सबकी मेहनत रंग लाई और 11 सितम्बर 2013 भोपाल वासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन बन गया | प्रातः 9 बजे से ही समूचे स्टेडियम के स्टेंड खचाखच भरे थे, वहीं मैदान में भी तिल रखने को जगह नहीं थी | जिधर देखो उधर विवेकानंद जी के चित्र युक्त टीशर्ट पहने नौजवान, बहुत से तो पूरी विवेकानंद जी की वेशभूषा में ही दिखाई दे रहे थे 

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